मोतिहारी : विराट रामायण मंदिर में आज स्थापित होगा दुनिया का सबसे विशाल शिवलिंग, ऐतिहासिक बनेगा दिन

Motihari: World's largest Shivling to be installed today at Virat Ramayana Temple, making it a historic day.

बिहार: पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में स्थित विराट रामायण मंदिर के लिए आज का दिन इतिहास में दर्ज होने जा रहा है। मंदिर परिसर में आज दुनिया के सबसे भारी और विशाल शिवलिंग की स्थापना की जाएगी। काले ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित इस शिवलिंग का वजन करीब 210 टन है, जबकि इसकी ऊंचाई और परिधि 33 फीट है। इस भव्य स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विशेष रूप से शामिल होंगे।

विशाल क्रेनों से होगी महाकाय शिवलिंग की स्थापना
शिवलिंग के अत्यधिक वजन और आकार को देखते हुए इसकी स्थापना एक बड़ी तकनीकी चुनौती मानी जा रही है। इसे निर्धारित स्थान पर स्थापित करने के लिए 700 टन और 500 टन क्षमता वाली दो विशेष क्रेनें लगाई गई हैं। ये क्रेनें खास तौर पर बंगाल और भोपाल से मंगाई गई हैं। मंदिर प्रशासन ने इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए हैं।

कैथवलिया का पौराणिक महत्व, त्रेतायुग से जुड़ा संबंध
विराट रामायण मंदिर के लिए पूर्वी चंपारण के कैथवलिया गांव का चयन केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि पौराणिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम, माता सीता से विवाह के बाद जनकपुर से अयोध्या लौटते समय अपनी बारात के साथ इसी स्थान पर एक रात ठहरे थे। लोक कथाओं के अनुसार, रामजी की ‘बहू’ माता सीता के यहां ठहराव के कारण पास के गांव का नाम ‘बहुआरा’ पड़ा। मंदिर परिसर के पूर्व में बहुआरा गांव आज भी स्थित है और निर्माणाधीन राम-जानकी पथ भी इसी मार्ग से होकर गुजर रहा है।

भव्य वास्तुकला, विश्वस्तरीय पहचान
विराट रामायण मंदिर अपनी वास्तुकला और विशालता के कारण भी विश्व में विशिष्ट पहचान बनाएगा। प्रस्तावित 150 एकड़ के परिसर में से फिलहाल 120 एकड़ क्षेत्र में निर्माण कार्य चल रहा है। इस परिसर में कुल 22 मंदिर और 12 शिखर बनाए जाने हैं।
मुख्य मंदिर की लंबाई 1080 फीट और चौड़ाई 540 फीट होगी। सबसे ऊंचा मुख्य शिखर 270 फीट ऊंचा प्रस्तावित है। इसके अलावा एक 190 फीट, चार 180 फीट, एक 135 फीट और पांच 108 फीट ऊंचे शिखर मंदिर परिसर की भव्यता को और बढ़ाएंगे। इसकी एक झलक पाने के लिए ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं।

अयोध्या–जनकपुर के बीच आस्था का सेतु
यह मंदिर आस्था के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या और माता सीता की जन्मभूमि जनकपुर धाम (नेपाल) के बीच मोतिहारी के कैथवलिया में यह भव्य मंदिर आकार ले रहा है। इसके आसपास के क्षेत्र को ‘जानकी नगर’ नाम दिया गया है।
राम-जानकी पथ के जरिए अयोध्या से मंदिर की दूरी लगभग 315 किलोमीटर, जनकपुर धाम से 115 किलोमीटर और राजधानी पटना से करीब 120 किलोमीटर है। आने वाले समय में यह मंदिर राम-जानकी मार्ग पर यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

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